श्रुतिजीत के के
नई दिल्ली : हाल ही में शनिवार की एक दोपहर। पश्चिमी
दिल्ली के पश्चिम विहार के डीडीए मार्केट में ए-6 बिल्डिंग। बाजार में कई दुकानें बंद थीं लेकिन इस इमारत से कई लोग जल्दबाजी में निकल रहे थे। इस कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर एक गुमनाम रियल एस्टेट कंपनी पीएसीएल इंडिया लिमिटेड का दफ्तर है। जहां तक पहुंचने के लिए अंधकार में डूबी हुई सीढि़यों से गुजरना पड़ता है, जिसकी दीवारों पर पान की पीक के निशान हैं। गर्मी की दोपहर होने के बावजूद पीएसीएल इंडिया लिमिटेड के ऑफिस में काफी गहमागहमी थी। यहां सैकड़ों लोग जमा हुए थे। दफ्तर में किसी बैंक के ब्रांच जैसा माहौल था। कई काउंटर पर लेन-देन हो रहा था और लोग छोटे ग्रुप में बातचीत कर रहे थे।
पश्चिमी दिल्ली सहित देश भर में फैले 280 ऑफिस से पीएसीएल जो कारोबार करती है, उसे सेबी अवैध मानता है। सेबी का मानना है कि यह कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम है, जिसे रियल एस्टेट कंपनी के रूप में चलाया जाता है। हालांकि कंपनी के वास्तविक कारोबार के रूप में अभी अंतिम रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अंतिम फैसला देगा, जहां यह पिछले आठ साल से लंबित है।
इस दौरान पीएसीएल का कारोबार बढ़कर 100 गुना हो गया है। ग्राहकों ने प्लॉट बुक कराने के लिए कंपनी को ये पैसे दिए हैं। हालांकि ग्राहकों को वह प्लॉट दिखाया गया है और ना ही उन्होंने अपनी पसंद की जमीन का टुकड़ा खुद चुना है। पीएसीएल के पास जमा ग्राहकों का पैसा बढ़कर 20,000 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी इसे अग्रिम भुगतान बताती है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को दी गई जानकारी में कंपनी ने अपने पास 1.85 लाख एकड़ जमीन होने की बात कही है, जो पूरे बंगलुरु के बराबर है। इसके मुकाबले देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों डीएलएफ या यूनिटेक के पास सिर्फ 12,000-15,000 एकड़ जमीन है। जमीन से ज्यादा पीएसीएल के ग्राहकों की दिलचस्पी इसकी कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से होने वाले फायदे पर है। पीएसीएल ने पांच से 10 साल के दौरान ग्राहकों से जितने रिटर्न का वादा किया है, वह सालाना 12.5 फीसदी से कुछ ज्यादा बैठता है।
पीएसीएल के पास डिपॉजिट जुटाने के लिए करीब 8 लाख एजेंटों का नेटवर्क है। ये पुराने पिरामिड स्कीम या चेन सिस्टम मॉडल पर काम करते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सेबी के पक्ष में रहता है और वह इसके कारोबार को कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम बताते हुए इसके सख्त रेगुलेशन का फैसला सुनाता है तो पीएसीएल के लाखों ग्राहकों को कंपनी में जमा अपनी बचत से हाथ धोना पड़ सकता है। पिरामिड के सबसे नीचे के ग्राहकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।
पीएसीएल इस तरह की स्कीम चलाने वाली देश की इकलौता कंपनी नहीं है। देश भर में कई कंपनियों द्वारा इस तरह की स्कीमें चलाई जा रही हैं। लोगों को रातो-रात अमीर बनाने की लालच देकर इस तरह की स्कीमें चलाई जा रही हैं। इसके लिए कानून पर लचर तरीके से अमल जिम्मेदार है। कुछ मामलों में निवेशकों की शिकायत पर गिरफ्तारियां भी हुई हैं। कंपनी मामलों का मंत्रालय (एमसीए) देश भर के बड़े अखबारों में कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीमों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर ग्राहकों को सावधान कर रहा है। एमसीए के सचिव डी के मित्तल ने कहा कि ऑनलाइन स्कीमों और दूसरी कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीमों के खिलाफ कई शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पीएसीएल के खिलाफ शिकायत नहीं मिली है। हालांकि दूसरी जगहों पर इस तरह की स्कीमों को लेकर कई शिकायतें मिली हैं।ग्वालियर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने कहा कि कलेक्टिव इनवेस्टमेंट योजनाओं को लेकर उन्हें 16 कंपनियों के खिलाफ 10,000 शिकायतें मिली हैं। इनमें पीएसीएल भी शामिल है। उनके प्रशासन ने पिछले महीने पीएसीएल और इस तरह की दूसरी कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने के लिए कदम उठाया था। साथ ही उसने ऐसी कंपनियों की प्रॉपर्टी सील करने की भी शुरुआत की। त्रिपाठी ने कहा, 'यह बहुत बड़ा तमाशा है। ये कंपनियां कह रही हैं कि वे जमीन या पशु या भगवान जाने किस चीज के नाम पर डिपॉजिट ले रही हैं, लेकिन असल में वे फाइनेंस ऑपरेशन चला रही हैं।'
नई दिल्ली : हाल ही में शनिवार की एक दोपहर। पश्चिमी
दिल्ली के पश्चिम विहार के डीडीए मार्केट में ए-6 बिल्डिंग। बाजार में कई दुकानें बंद थीं लेकिन इस इमारत से कई लोग जल्दबाजी में निकल रहे थे। इस कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर एक गुमनाम रियल एस्टेट कंपनी पीएसीएल इंडिया लिमिटेड का दफ्तर है। जहां तक पहुंचने के लिए अंधकार में डूबी हुई सीढि़यों से गुजरना पड़ता है, जिसकी दीवारों पर पान की पीक के निशान हैं। गर्मी की दोपहर होने के बावजूद पीएसीएल इंडिया लिमिटेड के ऑफिस में काफी गहमागहमी थी। यहां सैकड़ों लोग जमा हुए थे। दफ्तर में किसी बैंक के ब्रांच जैसा माहौल था। कई काउंटर पर लेन-देन हो रहा था और लोग छोटे ग्रुप में बातचीत कर रहे थे।
पश्चिमी दिल्ली सहित देश भर में फैले 280 ऑफिस से पीएसीएल जो कारोबार करती है, उसे सेबी अवैध मानता है। सेबी का मानना है कि यह कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम है, जिसे रियल एस्टेट कंपनी के रूप में चलाया जाता है। हालांकि कंपनी के वास्तविक कारोबार के रूप में अभी अंतिम रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अंतिम फैसला देगा, जहां यह पिछले आठ साल से लंबित है।
इस दौरान पीएसीएल का कारोबार बढ़कर 100 गुना हो गया है। ग्राहकों ने प्लॉट बुक कराने के लिए कंपनी को ये पैसे दिए हैं। हालांकि ग्राहकों को वह प्लॉट दिखाया गया है और ना ही उन्होंने अपनी पसंद की जमीन का टुकड़ा खुद चुना है। पीएसीएल के पास जमा ग्राहकों का पैसा बढ़कर 20,000 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी इसे अग्रिम भुगतान बताती है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को दी गई जानकारी में कंपनी ने अपने पास 1.85 लाख एकड़ जमीन होने की बात कही है, जो पूरे बंगलुरु के बराबर है। इसके मुकाबले देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों डीएलएफ या यूनिटेक के पास सिर्फ 12,000-15,000 एकड़ जमीन है। जमीन से ज्यादा पीएसीएल के ग्राहकों की दिलचस्पी इसकी कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से होने वाले फायदे पर है। पीएसीएल ने पांच से 10 साल के दौरान ग्राहकों से जितने रिटर्न का वादा किया है, वह सालाना 12.5 फीसदी से कुछ ज्यादा बैठता है।
पीएसीएल के पास डिपॉजिट जुटाने के लिए करीब 8 लाख एजेंटों का नेटवर्क है। ये पुराने पिरामिड स्कीम या चेन सिस्टम मॉडल पर काम करते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सेबी के पक्ष में रहता है और वह इसके कारोबार को कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम बताते हुए इसके सख्त रेगुलेशन का फैसला सुनाता है तो पीएसीएल के लाखों ग्राहकों को कंपनी में जमा अपनी बचत से हाथ धोना पड़ सकता है। पिरामिड के सबसे नीचे के ग्राहकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।
पीएसीएल इस तरह की स्कीम चलाने वाली देश की इकलौता कंपनी नहीं है। देश भर में कई कंपनियों द्वारा इस तरह की स्कीमें चलाई जा रही हैं। लोगों को रातो-रात अमीर बनाने की लालच देकर इस तरह की स्कीमें चलाई जा रही हैं। इसके लिए कानून पर लचर तरीके से अमल जिम्मेदार है। कुछ मामलों में निवेशकों की शिकायत पर गिरफ्तारियां भी हुई हैं। कंपनी मामलों का मंत्रालय (एमसीए) देश भर के बड़े अखबारों में कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीमों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर ग्राहकों को सावधान कर रहा है। एमसीए के सचिव डी के मित्तल ने कहा कि ऑनलाइन स्कीमों और दूसरी कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीमों के खिलाफ कई शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पीएसीएल के खिलाफ शिकायत नहीं मिली है। हालांकि दूसरी जगहों पर इस तरह की स्कीमों को लेकर कई शिकायतें मिली हैं।ग्वालियर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने कहा कि कलेक्टिव इनवेस्टमेंट योजनाओं को लेकर उन्हें 16 कंपनियों के खिलाफ 10,000 शिकायतें मिली हैं। इनमें पीएसीएल भी शामिल है। उनके प्रशासन ने पिछले महीने पीएसीएल और इस तरह की दूसरी कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने के लिए कदम उठाया था। साथ ही उसने ऐसी कंपनियों की प्रॉपर्टी सील करने की भी शुरुआत की। त्रिपाठी ने कहा, 'यह बहुत बड़ा तमाशा है। ये कंपनियां कह रही हैं कि वे जमीन या पशु या भगवान जाने किस चीज के नाम पर डिपॉजिट ले रही हैं, लेकिन असल में वे फाइनेंस ऑपरेशन चला रही हैं।'
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